Bangalore Stampede की खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 4 जून 2025 को जब RCB ने अपनी पहली IPL ट्रॉफी जीतकर इतिहास रच दिया, तब बेंगलुरु में हजारों फैंस इसका जश्न मनाने के लिए जमा हुए। लेकिन खुशी का यह माहौल कुछ ही समय में मातम में बदल गया, जब अचानक भीड़ बेकाबू हो गई और भगदड़ मच गई। इस घटना में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और 24 से ज़्यादा लोग घायल हो गए।
यह घटना बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास हुई, जहां फैंस को उम्मीद थी कि खिलाड़ियों का रोड शो या समारोह होगा। हालांकि सरकार ने सुरक्षा और ट्रैफिक की वजह से पहले ही इस तरह के किसी भी आयोजन को रद्द कर दिया था, लेकिन सूचना की कमी और भीड़ नियंत्रण की नाकामी ने स्थिति को बिगाड़ दिया। लोगों का मानना है कि अगर पहले से बेहतर प्लानिंग होती और पुलिस मुस्तैद होती, तो इस हादसे से बचा जा सकता था।
X पोस्ट पर लोगों ने इसकी तुलना मुंबई में 2024 की जीत के जश्न से की है, जहां लाखों लोग जमा हुए थे लेकिन व्यवस्था इतनी मजबूत थी कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। मुंबई की पुलिस को भीड़ नियंत्रण का दशकों का अनुभव है, खासकर गणेश चतुर्थी जैसे आयोजनों में जहां करोड़ों की भीड़ होती है। इसके उलट, बेंगलुरु में पुलिस को ट्रैफिक कंट्रोल करने में ही दिक्कत होती है और इस स्तर के इवेंट को संभालना उनके लिए मुश्किल साबित हुआ।
Bangalore Stampede के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इस हादसे का दोष सरकार और प्रशासन को दिया। कई यूजर्स ने यह भी कहा कि विराट कोहली या RCB टीम को दोष देना गलत है क्योंकि उन्होंने खुद इस परेड को रद्द कर दिया था। लेकिन लोगों की भावनाएं इतनी प्रबल थीं कि बिना आधिकारिक कार्यक्रम के भी हजारों की भीड़ इकट्ठा हो गई। इससे यह बात साफ होती है कि आयोजन न होने के बावजूद प्रशासन को यह अंदाजा लगाना चाहिए था कि लोग फिर भी आएंगे और उसके हिसाब से तैयारी करनी चाहिए थी।
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यह हादसा एक बड़ा सवाल उठाता है कि जब किसी शहर की टीम इतना बड़ा टूर्नामेंट जीतती है, तो क्या उसके लिए जश्न मनाने का कोई सुरक्षित तरीका प्रशासन के पास नहीं होता? क्या भीड़ को कंट्रोल करने के लिए कोई प्लान B नहीं था? और क्या हर बार ऐसे हादसों के बाद सिर्फ मुआवज़ा देना ही सरकार की ज़िम्मेदारी रह जाती है?
Bangalore Stampede ने यह साबित कर दिया कि भारत जैसे देश में भीड़ प्रबंधन अब भी एक गंभीर समस्या है। चाहे धार्मिक उत्सव हो या खेल की जीत, अगर प्रशासन सतर्क न हो तो हर खुशी मातम में बदल सकती है। यह वक्त है जब सरकारों को केवल सुरक्षा बल बढ़ाने के बजाय स्मार्ट प्लानिंग पर ध्यान देना चाहिए, ताकि जनता सुरक्षित रह सके और ऐसे हादसे भविष्य में न दोहराए जाएं।
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